Deforestation Essay In Hindi

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forests are like the lungs of the Earth — inhaling carbon dioxide and exhaling oxygen that we all need to survive. Destroying forests releases more carbon dioxide into the atmosphere each year than all of the planes, trains, cars, trucks and ships — combined. People all over the world — from rural communities to the biggest cities — are affected by global deforestation.Your support will go toward helping Conservation International protect the places where we can make the greatest impact, putting good conservation practices in place for the long term.We call it the environment, but that's the wrong word. It's our extended body. We have a “personal body” and a “universal body”, and they're both equally ours. When we have that experience, that knowledge, it will become impossible for us tooo hurt the earth. So my friends, don't choose the word 'environment"; look at the earth as your mother from where you were born, and also remember that all its beautiful forests, its flowers and gardens, its trees, its atmosphere, its rivers---they're all a part of our own biological organism. Love her... as you love yourself.forests are like the lungs of the Earth — inhaling carbon dioxide and exhaling oxygen that we all need to survive. Destroying forests releases more carbon dioxide into the atmosphere each year than all of the planes, trains, cars, trucks and ships — combined. People all over the world — from rural communities to the biggest cities — are affected by global deforestation.

Última atualização: 2016-07-01
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वनोन्मूलन का अर्थ है वनों के क्षेत्रों में पेडों को जलाना या काटना ऐसा करने के लिए कई कारण हैं; पेडों और उनसे व्युत्पन्न चारकोल को एक वस्तु के रूप में बेचा जा सकता है और मनुष्य के द्वारा उपयोग में लिया जा सकता है जबकि साफ़ की गयी भूमि को चरागाह (pasture) या मानव आवास के रूप में काम में लिया जा सकता है। पेडों को इस प्रकार से काटने और उन्हें पुनः न लगाने के परिणाम स्वरुप आवास (habitat) को क्षति पहुंची है, जैव विविधता (biodiversity) को नुकसान पहुंचा है और वातावरण में शुष्कता (aridity) बढ़ गयी है। साथ ही अक्सर जिन क्षेत्रों से पेडों को हटा दिया जाता है वे बंजर भूमि में बदल जाते हैं।

आंतरिक मूल्यों के लिए जागरूकता का अभाव या उनकी उपेक्षा, उत्तरदायी मूल्यों की कमी, ढीला वन प्रबन्धन और पर्यावरण के कानून, इतने बड़े पैमाने पर वनोन्मूलन की अनुमति देते हैं। कई देशों में वनोन्मूलन निरंतर की जाती है जिसके परिणामस्वरूप विलोपन (extinction), जलवायु में परिवर्तन, मरुस्थलीकरण (desertification) और स्वदेशी लोगों के विस्थापन जैसी प्रक्रियाएं देखने में आती हैं।

मानव के द्वारा की जाने वाली वनोन्मूलन के कारण[संपादित करें]

साधारण शब्दों में, वनोन्मूलन इसलिए होती है क्यों कि वन भूमि आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं है। खेती के लिए भूमि की मात्रा को बढ़ने के साथ साथ काष्ठ का उपयोग पूरे विश्व में २० करोड़ से अधिक लोगों के द्वारा किया जाता है।

एक आनुवंशिक संसाधन के रूप में वनों की अनुमानित मूल्य की पुष्टि किसी भी आर्थिक अध्ययन के द्वारा नहीं की गयी है।[1] इसके परिणाम स्वरुप वन भूमि के मालिक वनों की सफाई नहीं करने से नुकसान उठाते हैं और यह पूरे समाज के कल्याण को प्रभावित करता है।[2] विकासशील दुनिया के परिप्रेक्ष्य से, जैव विविध स्रोतों और कार्बन सिंक के रूप में वनों के लाभ प्राथमिक रूप से विकसित और अमीर राष्ट्रों को पहुँचते हैं और इस सेवाओ के लिए पर्याप्त क्षतिपूर्ति नहीं की जाती है। जिसके परिणाम स्वरुप कुछ देशों के पास बहुत अधिक वन हैं, विकासशील देश महसूस करते हैं कि विकसित दुनिया में कुछ देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, ने अपने जंगलों को सदियों पहले काटा और इससे बहुत अधिक लाभ उठाया और विकास शील देशों के लिए समान अवसरों का खंडन करना गलत होगा। यानि गरीब लोग अपने संरक्षण की लागत का भी वहन नहीं कर सकते हैं, जबकि अमीरों ने इस समस्या को पैदा किया।[2]

एक सामान्य समझौते के आलावा कि वनोन्मूलन भूमि के आर्थिक मूल्य को बढाती है, इस बात पर कोई समझौता नहीं है कि वनोन्मूलन के क्या कारण हैं। कुछ क्षेत्रों में लकड़ी के लिए वनोन्मूलन इसका सीधा स्रोत हो सकता है और कुछ क्षेत्रों में यह अप्रत्यक्ष स्रोत हो सकता है जैसे जो किसान जंगलों की सफाई के लिए जाना चाहते हैं, उनके लिए सड़क हेतू वनोन्मूलन: विशेषज्ञ इस बात से सहमत नहीं हैं कि लकड़ी के लिए पेडों का काटा जाना विश्वस्तरीय वनोन्मूलन में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।[3] और कुछ का मानना है कि लकड़ी को काटना वनोन्मूलन को कम करने में मुख्य योगदान देता है क्योंकि विकास शील देशों में लकड़ी के भंडार प्राकृतिक स्रोतों की तुलना में कहीं ज्यादा होते हैं।[4] इसी प्रकार वहाँ पर इस बात पर सहमती नहीं है कि गरीबी वनोन्मूलन में महत्वपूर्ण है। कुछ लोगों का तर्क है कि गरीब लोग लकड़ी काटने को प्राथमिकता देते हैं क्यों कि उनके पास कोई और विकल्प नहीं है। अन्य लोगों का मानना है कि गरीब लोगों के पास जंगलों की सफाई के लिए आवश्यक पदार्थ और श्रम के लिए कीमत चुकाने की क्षमता नहीं होती है।[3] जनसँख्या वृद्धि वनोन्मूलन को बढ़ावा देती है, इस प्रकार के दावे कमजोर हैं और त्रुटि युक्त आंकडों पर आधारित हैं,[3] जनसँख्या वृद्धि के साथ वनोन्मूलन का प्राथमिक रूप से बढ़ना केवल ८ प्रतिशत मामलों में ही पाया जाता है।[5] एफएओ के अनुसार विश्व स्तरीय वनोन्मूलन की दर मानव जनसँख्या की वृद्धि दर के आंकडों से सम्बन्धित नहीं है, बल्कि यह प्रौद्योगिकीय प्रगति और अक्षम शासन की कमी का परिणाम है[6].वनोन्मूलन के मूल में कई कारण हैं, जैसे की भ्रष्टाचार (corruption) और संपत्ति और क्षमता का असमान (inequitable) वितरण,[7][8][9]जनसंख्या वृद्धि (population growth)[10] और अत्यधिक आबादी (overpopulation),[11][12] और शहरीकरण (urbanization).[13]वैश्वीकरण (Globalization) को अक्सर वनोन्मूलन को बढ़ावा देने वाले एक कारक के रूप में देखा जाता है।[14][15][16]

ब्रिटेन के पर्यावरण विज्ञानी नोर्मन मायर्स (Norman Myers) के अनुसार ५ प्रतिशत वनोन्मूलन का कारण है पशुओं के द्वारा चराई (cattle ranching), १९ प्रतिशत वनोन्मूलन लकडी के लिए काटे (logging) जाने के कारण होती है, २२ प्रतिशत का कारण है बढ़ते हुए ताड़ के तेल (palm oil) के लिए वृक्षारोपण और ५४ प्रतिशत का कारण है स्लेश एंड बर्न (slash-and-burn) प्रकार की खेती.[17]

वनोन्मूलन की दरें[संपादित करें]

वनोन्मूलन की दर के आंकड़े प्राप्त करना, अगर नामुमकिन नहीं तो बहुत मुश्किल है[18][19].एफएओ (FAO) आंकडे बड़े पैमाने पर अलग अलग देशों के वन निभागों की रिपोर्टों पर आधारित होते हैं। विश्व बैंक का अनुमान है कि बोलोविया में वनोन्मूलन के ८० प्रतिशत मामले और कोलंबिया में ४२ प्रतिशत मामले अवैध (illegal) होते हैं,[20] जबकि पेरू में अवैध कटाई (illegal logging) सभी क्रियाओं के ८० प्रतिशत के बराबर है।[21] उष्णकटिबन्धीय देशों के लिए, वनोन्मूलन का अनुमान बहुत अनिश्चित है: उपग्रह चित्रों के अनुसार कटिबन्धों में वनोन्मूलन की दर सबसे अधिक उद्धृत दर से २३ प्रतिशत कम है।[22] और कटिबन्धों के लिए वनोन्मूलन की सम्पूर्ण दरें + / - ५० % तक गलत हो सकती हैं।[23] इसके विपरीत उपग्रह चित्रों के एक नए विश्लेषण से पता चलता है कि अमेजन बेसिन (Amazon basin) में वनोन्मूलन की दर वैज्ञानिकों के पूर्व अनुमान से दो गुनी है।[24]

यू एन एफ ऐ ओ (UNFAO) के पास उपलब्ध वनोन्मूलन के सर्वोत्तम लम्बे समय के आंकडे हैं और इन्हीं आंकडों के आधार पर बीसवीं शताब्दी के मध्य से लेकर वैश्विक जंगल कवर लगभग स्थिर रहें हैं।[25]) और सबसे लम्बे उपलब्ध आंकडों के आधार पर वैश्विक जंगल कवर १९५४ से बढ़ गया है।[26] वनोन्मूलन की दर में भी कमी आ रही है। हर सदी में वनों की सफाई की दर में कमी आती जा रही है। विश्व स्तर पर वनोन्मूलन की दर १९८० के दशक के दौरान कम हुई,[27] १९९० में इसमें और तेजी से कमी आई. और २००० से २००५ तक और भी अधिक कमी आई.[28] इन प्रवृत्तियों के आधार पर ऐसी उम्मीद की जाती है कि वैश्विक वनोन्मूलन के विरोधी प्रयास अगली आधी सदी में वनोन्मूलन को कम करेंगे साथ ही वैष्विक जंगल कवर २०५० तक १० प्रतिशत बढ़ जायेगा-जो भारत के क्षेत्रफल के आकार के बराबर है। विकासशील उष्णकटिबन्धीय राष्ट्रों में वनोन्मूलन कि दरें उच्चतम हैं, यद्यपि .१९९० में लगभग ८.६ मिलियन हेक्टेयर वार्षिक उष्ण कटिबन्धीय वनोन्मूलन की दर के साथ विश्व स्तर पर उष्णकटिबन्धीय वनों की क्षति की दर भी कम हो रही है, जबकि पिछली सदी में ९.२ मिलियन हेक्टेयर की क्षति भी हुई है।[29]

एफएओ के आंकड़ों की उपयोगिता पर कुछ पर्यावरण समूहों द्वारा विवाद है। ये सवाल प्राथमिक रूप से उठाये जाते हैं, क्यों की आंकडे वनों के प्रकार के बीच विभेदन नहीं करते हैं। डर यह है कि उच्च विविध निवास, जैसे उष्णकटिबन्धीय वर्षा वन (tropical rainforest) में वनोन्मूलन में वृद्धि होगी, जो कम जैव विविध शुष्क, खुले वनों के प्रकार में बड़ी कमी का सामना कर रहे हैं। इस कमी के कारण यह संभव है कि वनोन्मूलन के कई नकारात्मक प्रभाव जैसे आवास में कमी, वनोन्मूलन में कमी के बावजूद बढ़ रहे हैं। कुछ पर्यावरण विज्ञानियों का अनुमान है कि यदि पुराने वनों की सुरक्षा के लिए विश्व स्तर पर[vague]महत्त्व पूर्ण कदम[30] नहीं उठाये जायेंगे, तो २०३० तक इसका केवल १० प्रतिशत ही शेष रह जायेगा.[31][32] और बचा हुआ १० प्रतिशत भी ख़त्म होने की कगार पर होगा। [31] ८० प्रतिशत ख़त्म हो चुका होगा। और उसके साथ ही सैंकडों हजारों प्रजातियाँ भी विलुप्त हो जाएँगी, जिनकी क्षतिपूर्ति असंभव होगी। [31]

पिछले ३० सालों के दौरान वनोन्मूलन में कमी आने के बावजूद वनं की कटाई एक गंभीर विश्वस्तरीय पर्यावरणी समस्या बनी हुई है और कई क्षेत्रों में यह एक सामाजिक और आर्थिक समस्या बनी हुई है। १३मिलियन हेक्टेयर का हर साल नुकसान होता है, जिसमें से ६ मिलियन हेक्टेयर ऐसे वन हैं जिन्हें मानव के द्वारा बड़े पैमाने पर नुकसान नहीं पहुँचाया गया है।[33] इसके परिणाम स्वरुप वन्य जीवन के लिए आवास में कमी आती है और साथ ही इन वनों के द्वारा उपलब्ध करायी गयी पारिस्थितिक तंत्र सेवाओ (ecosystem services) में भी कमी आती है।

वनोन्मूलन की दर में आई गिरावट, पहले से ही वनोन्मूलन से हो चुके नुकसान की भरपाई नहीं करती है। विश्व स्तर पर वनोन्मूलन १८०० के मध्य में तेजी से बढ़ी,[31] और १९४७ तक परिपक्व उष्णकटिबन्धीय वन (tropical forest) का मूल १५ मिलियन से १६ मिलियन वर्ग किलोमीटर (५.८ मिलियन से ६.२ मिलियन वर्ग मी) का लगभग आधा यानि ७.५ से ८ मिलियन वर्ग किलोमीटर (२.९ मिलियन से ३ मिलियन वर्ग मी)[30][कब?]क्षेत्र साफ़ किया जा चुका था।[32]

वनोन्मूलन की दर क्षेत्र के अनुसार व्यापक रूप से बहुत अधिक भिन्नता रखती है। कुछ क्षेत्रों में वैश्विक कमी के बावजूद, विशेष रूप से विकास शील उष्ण कटिबन्धीय राष्ट्रों में, वनोन्मूलन की दर बढ़ रही है। उदाहरण के लिए, नाइजीरिया ने अपने पुराने ८१% वनों को[34] केवल १५ सालों (१९९० - २००५) में खो दिया। पूरा अफ्रीका विश्व से दोगुनी दर पर वनोन्मूलन से पीड़ित है।[35] वनोन्मूलन के प्रभाव उष्णकटिबन्धीय वर्षावन (tropical rainforests)[36] में सबसे अधिक स्पष्ट हैं। ब्राजील अपने माता अत्लान्तिका (Mata Atlântica) वनों का ९०-९५ प्रतिशत खो चुका है।[37]मध्य अमेरिका (Central America) में तराई उष्णकटिबन्धीय वनों के दो तिहाई भाग १९५० के बाद से चरागाहों में बदल चुके हैं।[38]रोंडोनिया के ब्राजीली (Rondonia) राज्य का आधा २४३,००० किमी ² हाल ही के वर्षों में[39] वनोन्मूलन से प्रभावित हुआ है। और मैक्सिको, भारत, फिलीपींस, इंडोनेशिया, थाईलैंड, म्यांमार (Myanmar), मलेशिया, बांग्लादेश, चीन,श्रीलंका, लाओस, नाइजीरिया, कांगो (Congo), लाइबेरिया, गिनी, घाना और कोट डिलवोइर (Côte d'Ivoire) सहित उष्ण कटिबन्धीय देशों ने अपने वर्षा वनों (rainforest) के बहुत बड़े क्षेत्रों का नुक्सान उठाया है,[40][41] क्योंकि क्षेत्रों में ये दरें अलग अलग हैं और वनोन्मूलन की दरों में वैश्विक कमी आवश्यक रूप से यह सूचित नहीं करती है कि वनोन्मूलन के नकारात्मक प्रभाव भी कम हो रहें हैं।

साइबेरिया (Siberia) के बड़े क्षेत्रों को सोवियत संघ के पतन के बाद से सींचा गया है।[42] पिछले दो दशकों में, अफगानिस्तान ने पूरे देश में ७० प्रतिशत से अधिक वनों को खो दिया है।[43]

वनोन्मूलन की प्रवृति कुज्नेट वक्र (Kuznets curve) के अनुसार हो सकती है,[44] हालाँकि यदि यह सच भी हो तो गैर आर्थिक वन मूल्यों के अनुत्क्रम्णीय क्षति के जोखिम की वजह से यह तथाकथित हॉट स्पोट्स पर समस्या जनक होगा। [45][46]

पर्यावरणीय कारक और प्रभाव[संपादित करें]

वायुमंडलीय[संपादित करें]

वनोन्मूलन जारी है और जलवायु (climate) और भूगोलमें परिवर्तन ला रही है।[47][48][49][50]

वनोन्मूलन ग्लोबल वार्मिंग,[51][52] में योगदान देती है और हरित गृह प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए एक मुख्य कारक है। उष्णकटिबन्धीय वनोन्मूलन दुनिया की २० प्रतिशत ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के लिए उत्तरदायी है।[53]जलवायु परिवर्तन पर इंटरगर्वमेंटल पैनल (Intergovernmental Panel on Climate Change) के अनुसार, मुख्य रूप से उष्ण कटिबन्धीय क्षेत्रों में, वनोन्मूलन कुल एंथ्रोतपोजेनिक (anthropogenic)कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन[54] के एक तिहाई के लिए उत्तरदायी है। पेड़ और अन्य पोधे प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान वायुमंडल से कार्बन डाई ऑक्साइड (atmosphere) के रूप में कार्बन को हटा देते हैं। और सामान्य श्वसन की प्रक्रिया के दौरान इसे फिर से वायुमंडल में छोड़ देते हैं। केवल सक्रिय वृद्धि के दौरान ही एक पेड़ या वन एक साल या लम्बी अवधि के लिए कार्बन को हटा सकता है। अपघटन या लकड़ी के जलने से यह संचित कार्बन वायुमंडल में लौट जाता है। वन कार्बन को ले सकें इसके लिए लकड़ी को लम्बे समय तक जीवित रहने वाले उत्पादों में बदल दिया जाना चाहिए और पेड़ों को फिर से उगाना चाहिए। [55] वनोन्मूलन के कारन कार्बन मिटटी में मुक्त होकर संचित हो जाती है। वन कार्बन के भंडार हैं और या तो घट (सिंक) सकते हैं या स्रोत वातावर्णीय परिस्थितियों पर निर्भर कर सकते हैं। परिपक्व वन शुद्ध सिंक और कार्बन डाइऑक्साइड के शुद्ध स्रोत के बीच विकल्प होते हैं, (देखें कार्बन डाइऑक्साइड सिंक (carbon dioxide sink) और कार्बन चक्र (carbon cycle))

उष्णकटिबन्धीय वनोन्मूलन से उत्सर्जन को कम करने और विकास शील देशों में वन अवनमन के कारण जारी जलवायु नीतियों को पूरा करने के लिए नयी संभावनाएं उत्पन्न हुई हैं। इस तथ्य के पीछे विचार है वनोन्मूलन और वन अवनमन से उत्पन्न हरित गृह गेस के उत्सर्जन को कम करने के लिए वित्तीय क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराना".[56]

सामान्य व्यक्तियो का मानना है कि विश्व वर्षा वन, विश्व में ऑक्सीजन की मात्रा में मुख्य भूमिका निभाते हैं,[57] हालाँकि अब वैज्ञानिकों ने स्वीकार कर लिया है कि वर्षा वन वायुमंडल में बहुत कम शुद्ध ऑक्सीजन (atmosphere) का योगदान देते हैं। और वनोन्मूलन का वायुमंडल में ऑक्सीजन के स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।[58][59] बहरहाल, भूमि को साफ़ करने के लिए भस्मीकरण और वनों को जलाना कई टन कार्बन डाई ऑक्साइड उत्पन्न करता है जो ग्लोबल वार्मिंग में योगदान देती है।[52]

वन वायु में से कार्बन डाइऑक्साइड और प्रदूषकों को निष्कर्षित करने में समर्थ होते हैं। और इस प्रकार से जैव मंडल की स्थिरता बनाये रखने में योगदान देते हैं।

हाइड्रोलोजिक[संपादित करें]

जल चक्र भी वनोन्मूलन से प्रभावित होता है। पेड़ अपनी जड़ों के माध्यम से भूजल अवशोषित करते हैं और वातावरण में मुक्त कर देते हैं। जब जंगल का एक हिस्सा निकाल दिया जाता है तो पेड़ इस पानी को वाष्पीकृत नहीं करते और इसके परिणाम स्वरुप वातावरण शुष्क हो जाता है। वनोन्मूलन मिटटी में जल की मात्रा को, भू जल की मात्रा को और वातावरण में नमी की मात्रा को कम कर देती है।[60] वनोन्मूलन मिट्टी की संसंजन क्षमता में कमी लाती है जिससे अपरदन (erosion), बाढ़ और भूस्खलन (landslide) निश्चित हो जाते हैं[61][62] वन कुछ स्थानों में एक्वीफायर (aquifer) के पुनरावेशन को बढ़ावा देते हैं, हालाँकि, अधिकांश स्थानों में वन ही एक्वीफायर में कमी का मुख्य स्रोत हैं।[63]

वनों में कमी अवक्षेपण के वाष्पोत्सर्जन (transpire) रख रखाव के लिए सिकुडन और लैण्ड स्केप की क्षमता को कवर करती है। अवक्षेपण पर पकड़ बनाने के बजाय जो भू जल प्रणाली को भेदता है, वन रहित क्षेत्र सतही जल के प्रवाह का स्रोत बनजाता है, जो भूमि के नीचे के प्रवाह की तुलना में अधिक तेजी से गति करता है। यह सतही जल का तीव्र प्रवाह फ़्लैश बाढ़ (flash flood) का कारण हो सकता है और इस प्रकार से वन युक्त क्षेत्रों में बाढ़ की संभावनाएं बढ़ जाती हें. वनोन्मूलन वाष्पजलोत्सर्जन (evapotranspiration) में भी कमी लाती है, जो वायुमंडल में नमी की मात्रा को कम करता है, जिससे कुछ मामलों में अवक्षेपण के स्तर कम हो जाते हैं। चूँकि जल नीचली हवाओं के क्षेत्रोंमें पुनः नवीनीकृत नहीं होता है, लेकिन तीव्र धारा के रूप में प्रवाहित हो जाता है और सीधे समुद्र में पहुँच जाता है। एक प्रारम्भिक अध्ययन के अनुसार, वन रहित उत्तर और उत्तर पश्चिम चीन में, औसत वार्षिक अवक्षेपण १९५० से १९८० के बीच एक तिहाई कम हो गया।[तथ्य वांछित]

सामान्य रूप से पेड़ और पोधे जल चक्र (water cycle) को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं।

इसके परिणाम स्वरुप पेड़ों की उपस्थिति या अनुपस्थिति सतह पर, मिटटी में या भूजल में या वायुमंडल में जल की मात्रा को परिवर्तित कर सकती है। यह बदले में अपरदन की दरों को परिवर्तित कर देता है और या तो पारिस्थितिक तंत्र के लिए या मानव सेवाओ के लिए जल की उपलब्धता में परिवर्तन आ जाता है।

बहुत अधिक बारिश के मामले में वन बाढ़ पर बहु कम प्रभाव डालते हैं, जो वन की मृदा की संग्रहण क्षमता को पराजित कर देता है यदि मृदा संतृप्त है या संतृप्ति के करीब है।

उष्णकटिबन्धीय वर्षावन हमारे ग्रह के ताजे जल का लगभग ३० प्रतिशत उत्पन्न करते हैं।[65]

मृदा[संपादित करें]

जिन वनों के साथ छेड़ छाड़ नहीं की जाती, उनकी मृदा हानि की दर बहुत कम होती है, लगभग २ मीट्रिक टन प्रति वर्ग किलोमीटर (प्रति वर्ग मील ६ छोटे टन)[तथ्य वांछित]वनोन्मूलन आमतौर पर मृदा अपरदन (erosion) की दर को बढा देती है, क्योंकि प्रवाह (runoff) की मात्रा बढ़ जाती है और पेडों के व्यर्थ पदार्थों से मृदा का संरक्षण कम हो जाता है। यह अत्यधिक रिसाव युक्त उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों की मृदा के लाभकारी हो सकता है। वानिकी कार्य भी सड़कों के विकास और यांत्रिक उपकरणों के उपयोग के माध्यम से अपरदन की दर में वृद्धि करते हैं।

चीन का लोएस पठार (Loess Plateau) सहस्राब्दियों पहले साफ़ कर दिया गया। तब से इसमें अपरदन हो रहा है और नाटकीय ढंग से घाटियों का निर्माण हो रहा है, इससे निकले पीले अवसाद ने येल्लो नदी को पीला रंग दिया है, यह नीचले क्षेत्रों में नदी में बाढ़ का कारण होता है (इसीलिए नदी को चीन का दुःख कहा जाता है)

पेडों को हटाना हमेशा अपरदन की दर में वृद्धि नहीं करता है। दक्षिण पश्चिम संयुक्त राज्य के विशेष क्षेत्रों में झाडियाँ और पेड़ चरागाहों पर अतिक्रमण कर चुके हैं। पेड़ खुद पेड़ केनोपी के बीच में घास की हानि को बढ़ावा देते हैं। नग्न अन्तर केनोपी क्षेत्र उच्च स्तर पर अपरदन के योग्य बन जाते हैं। उदाहरण के लिए, बेन्देलियर राष्ट्रीय स्मारक में संयुक्त राज्य वन सेवा इस बात पर अध्ययन कर रही है कि पेडों को हटा कर भी पूर्व पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे पुनः प्राप्त किया जाये और अपरदन को कैसे कम किय जाये.

वृक्ष की जड़ें मिटटी को बांधती हैं और यदि मिटटी पर्याप्त उथली है तो वे मिटटी को आधारी चट्टान (bedrock) के साथ बाँधे रखती है। और इस प्रकार से मिटटी अपनी जगह पर बनी रहती है। उथली मृदा युक्त तीव्र ढलान पर पेडों को हटा देने से भूस्खलन (landslide) का खतरा बढ़ जाता है जो आस पास के लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। हालाँकि अधिकतर वनोन्मूलन से पेडों के तने ही प्रभावित होते हैं, जड़ें वहीँ बनी रहती हैं और भू स्खलन के खतरे को कम करती हैं।

पारिस्थितिकी[संपादित करें]

वनों कि कटाई के परिणाम स्वरुप जैव विविधता में कमी आई है।[66] वन क्षेत्रों का विनाश पर्यावरण के अवनमन का कारण बना है जिससे जैव विविधता (biodiversity)[12] कम हो गयी है। वन जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि ये वन्य जीवन (wildlife) को आवास प्रदान करते हैं;[67] इसके अलावा वन औषधीय संरक्षण (medicinal conservation)[68] का काम भी करते हैं। नयी दवाओं के अप्रतिस्थापनीय स्रोत होते हुए, वन बायोटोप (जैसे कि टेकसोल (taxol)), वनोन्मूलन अनुत्क्रमणीय रूप से आनुवंशिक भिन्नताओं (जैसे फसल की प्रतिरोधी क्षमता) को नष्ट कर देती है।[69]

चूंकि उष्णकटिबन्धीय वर्षावन धरती पर सबसे अधिक विविधता से युक्त पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem) हैं,[70][71] और लगभग दुनिया की ज्ञात ८० प्रतिशत जैव विविधता (biodiversity) उष्ण कटिबन्धीय वर्षा वनों में पाई जाती है।[72][73] जंगलों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के विनाश के फल स्वरुप वातावरण की गुणवत्ता (degraded)[74] में कमी आई है और जैव विविधता भी कम हो गयी है।[75]

विलुप्त होने की प्रक्रिया की वैज्ञानिक समझ, जैव विविधता पर वनोन्मूलन के प्रभावों को समझने के लिए पर्याप्त नहीं है।[76] वानिकी से सम्बन्धित जैव विविधता के अधिकांश अनुमान प्रजाति क्षेत्र नमूनों पर आधारित हैं, जिसमें एक धारणा अन्तरनिहित है कि जैसे जैसे वनों में कमी आएगी, प्रजातियों की विविधता भी कम हो जायेगी.[77] हालांकि, कई ऐसे कई नमूने गलत साबित हुए हैं और आवास की कमी आवश्यक रूप से बड़े पैमाने पर प्रजातियों की क्षति के लिए उत्तरदायी नहीं है।[78] प्रजाति क्षेत्र नमूने उन प्रजातियों की संख्या का अनुमान लगाते हैं जो लुप्त होने की कगार पर हैं, उन क्षेत्रों में वास्तव में वनोन्मूलन जारी है। ये इस प्रकार की व्यापक प्रजातियों की संख्या का भी अनुमान लगाते हैं।[76]

ऐसा अनुमान लगाया गया है कि हम वर्षावनोन्मूलन के कारण प्रति दिन १३७ पोधों, जंतुओं और कीडों की प्रजातियों को खो रहे हैं, यह आंकडा ५०,००० प्रजाति प्रति वर्ष के बराबर है।[79] अन्य कहते हैं कि उष्ण कटिबन्धीय वनोन्मूलन के कारण होलोसीन द्रव्य विलोपन (Holocene mass extinction) जारी है[80][81] वनोन्मूलन की दरों से ज्ञात विलोपन की दरें बहुत कम हैं, लगभग १ प्रजाति प्रति वर्ष स्तनधारियों और पक्षियों से है जबकि सभी प्रजातियों के लिए लगभग २३००० प्रजाति प्रति वर्ष है। भविष्यवाणी है कि दक्षिण पूर्व एशिया (plant species) में जंतु और पादप प्रजातियों के ४० प्रतिशत से ज्यादा २१ वीं सदीं में विलुप्त हो जायेंगे.[82] ऐसे अनुमानों के साथ १९९५ के आंकडों के द्वारा प्रश्न उत्पन्न हुए हैं, जो दर्शाते हैं कि दक्षिण पूर्व एशिया के भीतर अधिकांश मूल जंगल एक विशिष्ट वनस्पति में बदल गए हैं, लेकिन विलुप्त होने की कगार पर खड़ी संभावी प्रजातियाँ संख्या में बहुत कम हैं और वृक्ष फ्लोरा व्यापक और स्थिर बना हुआ है।[76]

आर्थिक प्रभाव[संपादित करें]

वनों को हुई क्षति और प्रकृति के अन्य पहलू विश्व में ग़रीबों (living standard) के जीवन स्तर (poor) को आधा कर देंगे और वैश्विक जी डी पी को २०५० तक ७ प्रतिशत घटा देंगे। एक मुख्या रिपोर्ट ने बोन में जैव विविधता पर स्वीकृति (Convention on Biological Diversity) पर हुई एक बैठक में यह निष्कर्ष निकला। [83] पानी और खेती योग्य भूमि की तुलना में, लकड़ी और ईंधन की लकड़ी सहित वन उत्पादों की ऐतिहासिक दृष्टि से उपयोगिता ने मानव समाज में मुख्य भूमिका निभाई है। आज, विकसित देश मकानों के निर्माण के लिए लकड़ी का और कागज (paper) के लिए लकड़ी की लुगदी का उपयोग कर रहे हैं। विकासशील देशों में लगभग तीन बिलियन लोग गर्म करने और खाना पकाने के लिए लकड़ी पर निर्भर हैं।[84]

वन उत्पाद उद्योग विकसित और विकासशील दोनों प्रकार के देशों की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है। वनों से खेती के लिए रूपांतरण के द्वारा उत्पन्न लघु अवधि के आर्थिक लाभ या लकड़ी के उत्पादों का अति दोहन प्रारूपिक रूप से दीर्घकालिक जैविक उत्पादकता और आय के लिए हानिकारक होता है। (इसलिए प्रकृति की सेवाओं (nature's services) में कमी आती है।)पश्चिम अफ्रीका (West Africa), मेडागास्कर, दक्षिण पूर्व एशिया और कई अन्य क्षेत्रों में लकड़ी के उत्पादन में गिरावट के कारण राजस्व में कमी आई है। अवैध कटाई के कारण वार्षिक रूप से राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था को कई बिलियन डॉलर का नुकसान होता है।[85]

लकडी की अधिक मात्रा को प्राप्त करने के लिए नयी प्रक्रियाएं, अर्थ व्यवस्था को अधिक नुकसान पहुंचती हैं और लकड़ी की कटाई में रोजगार प्राप्त कर रहे लोगों के द्वारा खर्च किये गए धन में नुकसान का कारण होतीं हैं।[86] एक अध्ययन के अनुसार, "अधिकांश अध्ययन किये गए क्षेत्रों में, भिन्न उद्यम जो वनोन्मूलन का काम करते हैं वे मुश्किल से ५ अमेरिकी डॉलर की कमाई के लिए एक टन कार्बन को मुक्त कर देते हैं और औसतन उन्हें १ अमेरिकी डॉलर से कम प्राप्ति होती है। यूरोपीय बाजार में एक टन कार्बन की कटौती के लिए कीमत २३ यूरो (लगभग $ ३५) है।[87]

ऐतिहासिक कारण[संपादित करें]

अधिक जानकारी के लिए देखें: Timeline of environmental events

प्रागितिहास[संपादित करें]

वनोन्मूलन मनुष्य के द्वारा सभ्यता की शुरुआत से भी दस हजार वर्ष पहले से ही की जा रही है।[88] अग्नि वह पहला उपकरण थ जिसने मनुष्यों के परिदृश्य को संशोधित किया। वनोन्मूलन का पहला प्रमाण मध्य पाषाण काल (Mesolithic period) में मिलता है।[89] संभवतया इसका उपयोग नजदीकी वनों को खेल पशुओं के लिए अनुकूल परितंत्र में बदलने के लिए किया जाता था।[90] कृषि के आगमन के साथ, आग फसलों के लिए भूमि को साफ़ करने का मुख्य उपकरण बन गया। यूरोप में ७००० ई.पू. इसके बहुत कम ठोस सबूत मिलते हैं, मध्य पाषाण काल के पूर्व युगीन (foragers)लाल हिरण (red deer) और जंगली सूअर (wild boar) के लिए अवसर पैदा करने के लिए आग का उपयोग करते थे। ग्रेट ब्रिटेन की चाय सहनशील प्रजातियाँ जैसे ओक (oak) और एश (ash)पराग (pollen) अभिलेख में अखरोट (hazel), ब्रेम्बल, घास और पत्तियों के द्वारा प्रतिस्थापित हो गयी हैं। वनों को हटाये जाने से वाष्पोत्सर्जन (transpiration) में कमी आई है जिसके परिणाम स्वरुप पीट का दलदल (peat bog) निर्मित हुआ है। यूरोप में ८४०० -८३०० ई.पू. और ७२००-७००० ई.पू., के बीच एल्म (elm)पराग (pollen) में व्यापक कमी, दक्षिणी यूरोप में शुरू हुई और धीरे धीरे उत्तर में ग्रेट ब्रिटेन में फ़ैल गयी, यह नव पाषाण कृषि (Neolithic) की शुरुआत में आग के द्वारा भूमि की सफाई को बताता है।

नव पाषाण काल (Neolithic period) में कृषि भूमिके लिए व्यापक स्तर पर वनोन्मूलन की गयी।.[91][92] ३००० ई.पू. पत्थर की कुल्हादियाँ बनायीं गयी, जो केवल फ्लिंट से ही नहीं बल्कि पूरे ब्रिटेन और उत्तरी अमेरिका में कई प्रकार की कठोर चट्टानों से बनायीं गयी। इसमें अंग्रेज़ी झील जिला (English Lake District) में लेन्गडेल कुल्हाड़ी उद्योग (Langdale axe industry) शामिल है, उत्तर वेल्स (North Wales) और कई अन्य स्थानों में पेनमाएन्मावर (Penmaenmawr) में खदानें विकसित हुईं.खदानों के पास प्रारम्भिक उपकरण बनाये गए और कुछ को देखने में अच्छा बनाने के लिए पॉलिश भी किया गया। इससे न केवल कुल्हाड़ी की यांत्रिक शक्ति (mechanical strength) बढ़ी बल्कि लकड़ी को काटना अधिक आसान हो गया।फ्लिंट (Flint) का उपयोग अभी भी ग्रिम्स ग्रेव्स (Grimes Graves) जैसे स्रोतों से होता था, लेकिन यूरोप में कई अन्य खानों से भी होता था।

वनोन्मूलन के साक्ष्य मिनोयन (Minoan)क्रेट (Crete) में मिलते हैं; उदाहरण के लिए पेलेस ऑफ नोसोस (Palace of Knossos) के वातावरण में कांस्य युग में गंभीर कटाई की गयी।[93]

पूर्व औद्योगिक इतिहास[संपादित करें]

पूरे इतिहास में, मानव शिकारी थे जो जंगलों में शिकार करते थे। अधिकांश क्षेत्रों, जैसे अमेज़न (Amazon), कटिबन्धों, मध्य अमेरिका और कैरेबियाई,[94] में जब लकड़ी और अन्य वन उत्पादों की कमी हो गयी, तब वन संसाधनों को उपयुक्त तरीके से प्रयोग करने की नीतियाँ बनायीं गयी।

प्राचीन यूनान (ancient Greece) में ताजीर्द एच वन इंदल और सह लेखकों[95] ने ऐतिहासिक अपरदन और क्षरण के तीन क्षेत्रीय अध्ययनों का सारांश दिया और पाया कि, जहाँ भी उपयुक्त प्रमाण उपस्थित हैं, नव पाशान काल के अन्त से कांस्य युग के प्रारंभ तक यूनान के भिन्न क्षेत्रों में खेती की शुरुआत के ५००-१००० सालों में अपरदन हुआ। पहली सहस्राब्दी के मध्य काल के बाद हजार सालों में असंख्य स्थानों में बहुत अधिक मिटटी का अपरदन हुआ। बंदरगाहों की ऐतिहासिक अवसादन (silting) जिसमें एशिया माइनर (Asia Minor) के दक्षिणी किनारों और (उदहारणक्लारस (Clarus) और [[एफेसस|इफिसुस, प्रिएने (Priene) और मिलेटस (Miletus), के उदाहरण जहाँ प्रवाह के द्वारा इकट्ठी हुई गाद या सिल्ट के कारण बंदरगाहों को छोड़ना पड़ता था।) तटीय सीरिया में पिछले शताब्दी ई.पू. के दौरान गाद का इकठ्ठा होना शामिल है। ]] (Ephesus)

ईस्टर द्वीप (Easter Island) ने हाल की शताब्दियों में भारी मृदा अपरदन (soil erosion) का सामना किया है, जो खेती और वनोन्मूलन का परिणाम है।[96]जारेद डायमंड (Jared Diamond) अपनी पुस्तक कोलाप्स (Collapse)में प्राचीन ईस्टर द्वीप वासियों के पतन के बारे में बताते हैं। द्वीप में पेडों के गायब हो जाने के साथ १७ वीं और १८ वीं शताब्दी के आस पास यहाँ की सभ्यता का भी अन्त हो गया।[97][98]

ब्रुगेस (Bruges) के बन्दर गाह की प्रसिद्द सिल्टिंग, जिसने बंदरगाह के वाणिज्य को एन्टवर्प (Antwerp) में स्थानांतरित कर दिया, यह भी उपरी नदी की घाटियों में बढ़ी हुई आवास वृद्धि (और जाहिर तौर पर वनोन्मूलन के) के बाद हुआ। प्रारम्भिक मध्य युगीन रीज (Riez) में दो छोटी नदियों की जलोढ़ गाद ने नदी के किनारों को ऊपर उठा दिया और बाढ़ की समतल भूमि को चौडा कर दिया, जिससे धीरे धीरे रोमन आवास मिटटी में मिल गया और धीरे धीरे उच्च भूमि पर निर्माण कार्य हो गए; परिणाम स्वरुप रीज के ऊपर शीर्ष जल की घाटियाँ चरागाह के लिए खुल गयीं।[तथ्य वांछित]

एक प्रारूपिक प्रगति जाल (progress trap) यह है कि अक्सर शहरों को वनों के क्षेत्रों में बनाया जाता था और लकड़ी को निर्माण उद्योग को उपलब्ध करा दिया जाता था, (उदाहरण के लिए निर्माण, जहाज निर्माण, बर्तनों के उद्योग) जब वनोन्मूलन के साथ उपयुक्त पेड़ नहीं लगाये जाते हैं, स्थानीय लकड़ी की आपूर्ति प्रतिस्पर्धी रहने के लिए पर्याप्त नहीं रह जाती, जिससे शहरों का परित्याग करना पड़ता है जैसा कि प्राचीन एशिया माइनर (Asia Minor) में बार बार हुआ। खनन और धातु विज्ञान के संयोजन अक्सर इस आत्म विनाशकारी मार्ग के साथ चले[तथ्य वांछित]

इस बीच सबसे अधिक जनसंख्या कृषि के क्षेत्र में सक्रिय रही, (या अप्रत्यक्ष रूप से इस पर निर्भर रही) अधिकांश क्षेत्रों में मुख्य दबाव था फसल और मवेशियों के लिए भूमि की सफाई करना; भाग्यवश काफी हरे जंगल बच गए, (जिनका उपयोग आंशिक रूप से लकडी, जलने की लकडी, फल आदि इकठ्ठा करने के लिए किया जाता था।) जिससे वन्य जीवन बचा रहा और शिकार के लिए विशेषाधिकार लेना व्यवहार्य था जिससे महत्वपूर्ण वन भूमि संरक्षित रही।[तथ्य वांछित]

जनसँख्या के प्रसार में मुख्य भाग था (और इस प्रकार अधिक टिकाऊ विकास) विषयक 'अग्रणी'(विशेष रूप से बेनेडिकताइन और वाणिज्यिक आदेश) और कुछ सामंती यहोवा सक्रिय रूप से किसानों को अच्छी कानूनी और वित्तीय स्थितियों के माध्यम से आकर्षित कर रहे थे ताकि वे स्थापित हो जाएँ; यहाँ तक कि जब उन्होंने शहरों की स्थापना को प्रोत्साहित किया, तो चरों औ हमेशा एक कृषि बेल्ट रही और कुछ दीवारों के भीतर भी थीं दूसरी और जब ऐसे कारणों जैसे काली मृत्यु (Black Death) या विनाशकारी युद्ध के द्वारा जनसांख्यिकी वास्तव में सामने आई, (उदाहरण चंगेज खान के मंगोल फ़ौजपूर्वी और मध्य यूरोप में, जर्मनी में तीस साल का युद्ध (Thirty Years' War)) जिससे आवासों को छोड़ा जा रहा था, इस पर फिर से पेड़ लगाने कोशिश की जा रही थी, हालाँकि द्वितीयक वन (secondary forest) में आम तौर पर जैव विविधता (biodiversity) की कमी थी।

११०० से १५०० ई. में पश्चिमी यूरोप (Western Europe) में वनोन्मूलन की गयी, जिसके परिणाम स्वरुप मानव आबादी का विस्तार (expanding human population) हुआ। अन्वेषण, उपनिवेशवाद (colonisation), गुलामों के व्यापार (slave trade) के लिए १५ वीं सदी के बाद से यूरोपीय (तटीय) नौसेना मालिकों द्वारा लकड़ी नौकायन जहाजों के बड़े पैमाने पर निर्माण -; और ऊँचे समुद्रों पर अन्य व्यापार और नौसेना युद्ध (१५५९ में स्पैनिश अरमाडा (Spanish Armada) के द्वारा इंग्लेंड पर असफल आक्रमण और १५७१ में लेपान्तो का युद्द (battle of Lepanto) पुराने मामले हैं जिनमें लकड़ी का दुरूपयोग किया गया; नेल्सन के हर शाही नौसैनिक (Royal navy) युद्ध पोत को ६००० परिपक्व ओक की जरुरत होती थी,) और चोरी (piracy) यानि पूरे वन क्षेत्र पर आक्रमण किया जा रहा था, जैसे कि स्पेन में जहाँ किओलाम्बस के द्वारा अमेरिका की खोज के बाद से औपनिवेशिक गतिविधियों जैसे खनन, पशु, वृक्षारोपण, व्यापार ...आदि के कारण अर्थ व्यवस्था कमजोर हो गयी।

भूमि परिवर्तन (१९८३) में विलियम क्रोनोन (William Cronon) ने १७ शताब्दी की नई इंग्लैंड (New England) की अंग्रेजों की रिपोर्टों को संग्रहीत किया जिसमें प्राम्भिक समय में वनों की सफाई के दौरान मौसमी बाढ़ के बारे में बताया गया और ऐसा माना जाता था कि यह व्यापक रूप से वनोन्मूलन से सम्बन्धित था।

औद्योगिक पैमाने पर चारकोल (charcoal

पूर्वी बोलिविया में तेरास बेजास परियोजना में मानव के द्वारा वनोन्मूलन की प्रगति का कक्षीय चित्र तस्वीर शिष्टाचार नासा.
निओलिथिक कलाकृतियों की एक सरणी जिसमें शामिल हैं कंगन, कुल्हाड़ी के सिर, चिजल और चमकाने वाले औजार.

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