Essay In Hindi Anushasan

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अनुशासन पर निबंध (Essay on Discipline in Easy Hindi Language)

Discipline in Hindi

डिसिप्लिन एक सामाजिक मर्यादा है जो हमें स्वानुभूति से करना चाहिए | ये एक अच्छी सद्वृत्ति और सभ्य जीवन की विधा है हमारे अच्छे जीवन के लिए | अनुशासन शब्द ‘अनु’ उपसर्ग और ‘शासन’ मूल शब्द के मेल से बना है | अनु का अर्थ होता है पश्चात् या साथ और शासन का अर्थ नियमन या व्यवस्था | इस तरह अनुशासन शब्द का अर्थ है नियमन व्यवस्था का अनुसरण करना | नियमित जीवन जीने का प्रयत्न करना |  

साधारण शब्दों में कहा जाए तो जिस प्रकार दिन और रात का क्रम, समय पर ऋतू – परिवर्तन और मौसम के अनुसार पेड़ – पौधों में फल फूल आना प्रकृति का अनुशासन है | प्रकृति के अनुशासन में व्यवधान आ जाए, तो आकाल या दुष्काल का जन्म होता है | ठीक उसी प्रकार  वास्तविक जीवन और समाज में अपने घर द्वार से लेकर विभिन्न और विविध क्षेत्रों के सुसंचालन के लिए जो नियम बनाए गए या बन गए है, जो व्यवास्थएं निर्धारित की गई है या सभ्य सामाजिकों के आपसी व्यवहारों से आप ही हो गयी है उनके अनुसार चलना और उनका पालन करना अनुशासन है और जब मानव समाज में अनुशासन का ह्रास हो जाए तो संकटपूर्ण अराजक स्थिति पैदा हो जाती है |

अनुशासन टूटने पर सामाजिक जीवन की नींव खंडित हो जाती है | अत: अनुशासन हर एक व्यक्ति की पहली और प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए | सभी को यह समझना चाहिए कि सामूहिक अथवा सामाजिक जीवन को सुचारू रूप से संचालित करने हेतु अनुशासन अनिवार्य है | बल्कि अनुशासन को संस्कार से भी ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए | हम केवल तभी संस्कारवान रह सकते है जब हम सब स्वयं अनुशासित, विवेकजन्य व स्वप्रेरित हो |

यह संस्कार सामाजिक जीवन में ही पैदा किया जा सकता है और सामाजिक जीवन का आधार भी है | अत: यह कथन ठीक ही है कि अनुशासन समाज का भूत, वर्तमान और भविष्य भी है | अनुशासन का संस्कार सोचने – समझने, विचार और अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वाधीनता के वातावरण में विकसित होता है | भेड़ –चाल और अन्धानुकरण से इसका कोई वास्ता नहीं होता | यह एक सहज मनोवैज्ञानिक स्थिति है जो हमारे व्यवहार का नियमन करती है | अनुशासन की आवश्यकता हर स्थान पर और हर क्षेत्र में है |

गांधीजी ने भी अनुशासन को एक बड़ा कार्य कहा है | उनका मानना था कि अनुशासन एक ऐसा क्रम है एक ऐसी नियमित प्रक्रिया है जो कार्य अथवा जीवन की अभिव्यक्ति में सुन्दरता उत्पन्न करती है | Discipline ही है जो व्यक्ति को व्यवस्थित जीवन व्यतीत करना सिखाता है और उसके सुख का साधन बनता है |

जीवन में अनुशासन का महत्व (Importance of Discipline in Hindi)

Discipline in Hindi

व्यक्ति के निजी जीवन, सामाजिक जीवन और राष्ट्रीय जीवन सबमें इसका बड़ा महत्त्व है | जिस व्यक्ति के निजी जीवन में अनुशासन का अभाव होगा, उसे बार – बार विषम स्थितियों का सामना करना पड़ेगा | ऐसा व्यक्ति प्राय: अपने लक्ष्यों को पूरा कर पाने में असमर्थ रहेगा | समाज में भी ऐसे व्यक्ति को प्रतिष्ठा नहीं मिल पाती | अनुशासनहीन व्यक्ति अपने समाज की उन्नति में कोई योगदान नहीं कर सकता | वह समाज की प्रगति में बाधा और समाज के के लिए बोझ भी बन सकता है |

राष्ट्रीय जीवन में तो अनुशासन का सर्वाधिक महत्त्व है | जिस राष्ट्र के नागरिकों में अनुशासन होता है वे बड़े से बड़े संकट को भी स्वाभिमान के साथ झेल लेते है | अनुशासनहीन नागरिकों वाला राष्ट्र एक अनियंत्रित भीड़ जैसा होता है, जो कब कैसा आचरण करेगा कोई नहीं बता सकता | व्यक्ति ही समाज और राष्ट्र की ईकाई है | अत: जैसे व्यक्ति होंगे, वैसा ही उनका समाज और राष्ट्र होगा |

किसी राष्ट्र या समाज के चरित्र का अध्ययन उसके नागरिकों को देखकर किया जा सकता है | घर या घर से बाहर हर व्यक्ति का आचरण उसके संस्कारों को उजागर करता है | सड़क, पाठशाला, बाज़ार या कार्यालय में हमें ( हमारे व्यवहार – आचरण) देखकर हमारे संस्कारों का अंकन किया जा सकता है | सुसंस्कार ही अनुशासन का स्रोत बीज होते है |

विश्व के इतिहास  में किसी भी अनुशासनहीन समाज या राष्ट्र को न प्रतिष्ठा मिली और न महान सफलता | अनुशासन सफलता की कुंजी है | यह चरित्र का आभूषण और राष्ट्र का गौरव है |

अनुशासन का दूसरा नाम ‘मर्यादित आचरण’ हो सकता है | मर्यादित आचरण के अभाव में मनुष्य पतन की ओर अग्रसर होगा | कोई व्यक्ति कितना ही शिक्षित, बलशाली और सत्ता संपन्न हो, किन्तु उसके उत्कर्ष का मार्ग उसके मर्यादित आचरण द्वारा ही प्रशस्त होता है | अनुशासन की मर्यादा व्यक्ति को प्रगति, समाज को संबर्धन और राष्ट्र को गौरव की और उन्मुख करती है |

विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व और लाभ

अनुशासन जीवन को अलंकृत और चरित्र को दिव्य बनाता है | इस दृष्टि से विद्यार्थी जीवन में तो अनुशासन का विशेष महत्व है | विद्यार्थियों से समाज को दुगुनी अपेकाक्षाएं होती है, क्योंकि वे देश के भावी नायक है | इन्हें न केवल अपना बल्कि अपने परिवार, समाज तथा राष्ट्र का भी गौरव बढ़ाना होता है | इसलिए हर माता – पिता और अध्यापक को तार्किक रूप से अनुशासन के उद्देश्य, फायदे और जरुरत आदि के बारे में बच्चों से बात करनी चाहिए | उन्हें उन्हें जरुर बताना चाहिए कि अनुशासन को संस्कार की तरह ही प्राथमिकता देनी चाहिए |

अनुशासन एक संस्कार के रूप में विकसित किया जाना चाहिए | जिस प्रकार संस्कार के लिए अभ्यास और बोध आवश्यक होता है , उसी प्रकार अनुशासन के लिए भी अभ्यास और बोध की आवश्यकता होती है |

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अनुशासन 2 शब्दों के मेल से बना है- अनुशासन अर्थात शासन के पीछे चलना । देश, समाज, संस्था आदि के नियमों के अनुसार चलना अनुशासन कहलाता है । अनुशासन के बिना राष्ट्र बिना चप्पू की नौका के समान डगमगाने लगता है ।

जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का होना जरुरी है । क्या घर, क्या स्कूल, क्या सामाजिक जीवन अथवा सेवा में । माता पिता यदि अपने बच्चे को घर पर ही अनुशासन में रहने की शिक्षा दें तो वह समाज में भी शीघ्र अपना स्थान बना सकता है । जिस घर में अनुशासन न हो, वंहा कभी शांति नहीं हो सकती ।

इसी प्रकार स्कूलों तथा कॉलेजों में अनुशासन अनिवार्य है । अध्यापकों की आज्ञानुसार पढ़ना ही तो अनुशासन है । जिस विद्यालय में अनुशासन का अभाव हो उसके छात्र कभी चरित्रवान नहीं हो सकते । प्रत्येक कार्यालय में छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक सभी को अनुशासन में रहकर काम करना पड़ता है ।

सेना में तो अनुशासन का और भी महत्व है । सैनिक अनुशासन को बहुत अधिक महत्व देता है । तभी तो लड़ाई के मैदान में या भरी बारिश, बर्फ़बारी में भी हमारे सेना के जवान आगे बढ़ते रहते हैं । तभी देश विजयी होता है । यह सब अनुशासन का प्रताप है । कई मुर्ख अनुशासन को दासता कहकर इसका विरोध करते हैं ।

पुराने समय में भी राजा महाराजा भी अनुशासन का पालन कठोरता से करते थे । जानवर भी अनुशासन में रहना पसंद करते हैं । अतः हम सभी को हमेशा अनुशासन का पालन करना चाहिए ।

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